भजन विधि का विधान

भजन : विधि का विधानविधि विधान है सबसे ऊँचा,ईश्वर भी बँधा विधान में।विधाता की है लीला निराली,खेल रचाता विधान में॥हरि ओम् तत्सत् हरि ओम् तत्सत्॥महामृत्युंजय जिनका अंकर, महाकाल कहलाते शंकर।फिर भी सती को रोक न पाए,दग्ध हुईं यज्ञाग्नि के भीतर॥हरि ओम् तत्सत् हरि ओम् तत्सत्॥श्रीराम चले वनगमन को, भरत हुए व्यथित बेहाल।वशिष्ठ मुनि बोले धीरे … Read more

भजन हे राधे कृष्ण मुरारी

भजन : “हे राधे कृष्ण मुरारी✍️“हे राधे हे राधे राधे कृष्ण मुरारी॥”“जय नंदलाला गिरिधारी॥”हे राधे कृष्ण मुरारी,हे नंदलाला गिरिधारी॥हे मुरलीधर! हे वृंदावन बिहारी!आपकी जय हो, जय हो, जय हो॥क्या माँगूँ प्रभु आपसे,न धन न दौलत चाहूँ॥तेरी भक्ति में सुख पाऊँ,कृपा दृष्टि तुझसे चाहूँ॥बन जाऊँ मैं ग्वाल बाल,संग तेरे यमुना तट खेलूँ॥लीला तेरी मन हर लेती,तेरे … Read more

चलो लौट चलें बचपन की गलियों में

चलो लौट चलें, बचपन की गलियों में,जहाँ हर मोड़ पे खुशबू थी प्यारी।जहाँ मिट्टी भी गीत सुनाती थी,हर साँस थी जैसे त्योहार की तैयारी।चलो लौट चलें बचपन की गलियों में।जहाँ मन न थकता, न रुकता था,जहाँ हर सपना सच लगता था।जहाँ दोस्ती थी चाँद सी निर्मल,जहाँ झगड़े भी पल में मिटता था।सुनहरी धूप में साइकिल … Read more

द्रौपदी की पुकार

शरण तुम्हारी ले लूँ नंद लाला, दिखता न कोई उपाय।नाम तेरा जब मुख पे आए, सकल संकट मिट जाए॥हे नाथ नारायण वासुदेवा (२ )सभा भरी थी मौन पड़ी थी, नयनों में जलधार,पाँचों पांडव मौन हुए थे, टूटी द्रौपदी की हर इक आस।भूले सब निज धर्म को, रुकी पड़ी थी साँस,तब अधरों से पुकार उठी “हे … Read more

अंकल कहो आंटी नही

समाज में चलन बड़ा रोचक,महिलाएँ कहें “आंटी नहीं, दीदी कहो सच!”साठ हों या अस्सी, उम्र का पैमाना,‘आंटी’ शब्द सुनते ही बदल जाता निशाना।किट्टी पार्टी में हँसी का दौर,किसी ने कहा “आंटी जी, ज़रा इधर आएँ!”वरिष्ठ महिला फट पड़ी “क्या तुम मेरी बेटी हो जो आंटी कह रही?”सभी सकपका गए, बोले “अरे नहीं, बहनजी!”तब से ग्रुप … Read more

मन और मौन

कैसे स्वयं को खुश रखूँन चाहते हुए भी मन कभी-कभी विचलित हो जाता है।कोई न कोई बात, कोई नज़र, कोई घटना मन की शांति को हिला देती है।सूर्य निकलता है, किरणें फैलती हैं,मुस्कुराती हुई कहती हैं “मेरी ओर झाँको, मन का ताजा करो,दिन की शुरुआत ख़ुशियों से करो।”पर कभी-कभी नक्षत्र विपरीत होते हैं,राहु-केतु समय के … Read more

हरि भजन

हरि नाम सुमिरो मन रे .. मन रे.. मन रे .. मन रे ऊँ हरि हरि हरि हरितू क्यों आया इस जग मेंबिसरा क्यों दिया मन रे छोड़ सत्कर्म पाप चढ़ाया क्यूँ तू नहीं डरता मन रे ।ऊँ हरि हरि हरि हरिपगला तू गया मृगतृष्णा में,भव-बन्धन में क्यों फँसा मन रेक्षण भर का खेला है … Read more

आये थे हरि भजन को भजन

आये थे हरि भजन को,घोटन लगे कपास।विषयों में इतना रम गये,भव में बिखरा सुवास।ऊं हरि हरि हरि हरिमन ने कहा, छोड़ो तनिक,जन्म-मरण की बात।जीवन तुझको जो मिला,पहले उसको भोगो तात।ऊं हरि हरि हरि हरिभूल गया यम दंड-प्रहार,नहीं रहा कोई त्रास।जीवन की डोर कहीं और है,दीर्घायु पाने की आस।ऊं हरि हरि हरि हरिचल पड़े मन के … Read more

मैं अतिरिक्त हूँ

हाँ, मैं अतिरिक्त हूँ पर मैं भी तो इंसान हूँ,न पुरुष, न नारी सही,पर मेरा भी एक सम्मान है।न मैं पुरुष, न नारी हूँ,समाज से मैं परित्यक्त हूँ।कभी पुरुष बन जाता हूँ,कभी नारीत्व में अनुरक्त हूँ।मैं भी शरीक होता हूँआपकी खुशियों के मेले में,ढूँढता हूँ अपनी जड़ें रोज़आपके ही इस खेल में।पर नहीं जानता कहाँ … Read more

मत डरा मुझे

मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल ! मैं अजर हूँ, अमर हूँ, निडर बेहाल, तेरा शासन तन तक सीमितमैं आत्मा हूँ असीम विशाल।तू क्या मुझे मिटा सकेगामैं तो सत्य की ज्वाला हूँ, भस्म भले यह देह हो जाए पर मैं हरि का उजियाला हूँ।शक्ति हूँ मैं, शिव का अंश हूँ मुझमें … Read more