Poems
पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग चार
पुरानी यादों की चौथी श्रृंखला में चर्चा दोस्तों की हम करते हैं कुछ पुरानी मधुर स्मृतियों का ज़िक्र इस पटल पर करते हैं छः दशक से ऊपर कब बीत गये समय पंख फैलाए फिसल गयेसमय कहाँ पर रुकता है यह तो सतत चलता रहता है इसका आदि अंत नहीं होता है यह सब कुछ देखता … Read more
पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग तीन
स्मृतियों के पुराने पन्नो को आज हम थोड़ा पलटते हैं अपने समय के शादी विवाह के क़िस्सों की कुछ चर्चा हम करते हैं देवोत्थानी के आते ही देखुवा घर घर आ टपकते थे गाँव गाँव में आठवी से बारहवीं में पढ़ रहे बच्चों की टोह लगाते थे घर में ज़मीन जायदाद, बैलों की जोड़ी और … Read more
नेता बनने की चाह
मुझे भी नेता बनना है माननीय कहलाना हैकितना अच्छा लगता है जब आसमान से फूल बरसता है । गर्व की अनुभूति होती है सीना चौड़ा हो जाता है मन बल्लियों उछलने लगता है मयूर नृत्य करने का मन होता है । पढ़ने लिखने में तो मैं लम्पट हूँ, पर इस पोस्ट के लिये पूरा फ़िट … Read more
बया का घोंसला
ए मेरी प्यारी चिड़िया, किस विश्वविद्यालय से पढ़कर तू आयी है जो ऐसी दक्षता पायी है ?कितना सुन्दर, कितना अनुपम,प्यारा सा तेरा यह घोंसला है किन रेशमी तारों से यह सब बुनती है किस नट बोल्ट से तू कसती है । तूफ़ानों के झंझावातो को भी झेलने की क्षमता इसमें होती है धूप, हवा और … Read more
एकांत और अकेलापन
मन में एक जिज्ञासा आयी है,दो समानार्थी शब्दों की चर्चा करते हैं,दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं,पर आकाश पाताल का अंतर है । स्वभाव से दोनो उल्टे होते हैं,पर भाई भाई जैसे लगते हैं,एक को “एकांत” हम पुकारते हैं,दूसरे को “अकेलापन “ बोला जाता है ।अकेलापन की पहले बात करे,यह एक दुखी आत्मा होती … Read more
जीवन की यात्रा बहुत छोटी है
कोई आपसे करे शरारत चुपचाप सहन कर लेना सब,न बने असभ्य, न करे लड़ाई,जीवन की यात्रा बहुत छोटी है । मन में सदा यह गाँठ बाँध लें, निर्थक बातों पर चर्चा नहीं करना है,शांत रहे, तनाव ग्रस्त न रहे आप,जीवन की यात्रा बहुत छोटी है । कोई आपको करे अपमानित नज़र अंदाज करें, न विवाद … Read more
तीन पहर भजन
रे मन ! तीन पहर तो बीत गये कब आये कब निकल गये समय पंख लगाकर उड़ेबहुमूल्य क्षण फिसल गये ॥रे मन चौथा पहर जब आ गया भाई मन में यह अहसास भये घर गृहस्थी के भँवर जाल में समय व्यर्थ सब गये ॥ रे मन तर्क वितर्क में फँसे रहे अज्ञानी निर्थक जीवन सब … Read more
कुम्हार और माटी
तोड़ दी माटी की चिलममाटी हो गयी नाराज़ माटी बोली ऐ कुम्हार तेरी क्या मति हुई बेकार ।बोला कुम्हार ए प्यारी माटी मति में तो हुई अब मेरे सुधार मैंने बदला अपना फ़ैसला अब होगा सुराही का निर्माण ।माटी की बाँछें खिली खिली हो गयी वह उस पर निहाल बोली मति तो हुई मेरी बेकार … Read more