भोले बाबा की होली

भोले बाबा की होली ✍️डम डम बाबा डमरू बजाये खेलत होली काशी मेंठुमक ठुमक कर नंदी नाचे धूम मचाये काशी में ॥ शमशाने की भस्म लगाये दिगम्बर का रुप बनाये मणिकर्णिका घाट पर खेलत होली भोले बाबा काशी में।नटराज तांडव नृत्य दिखाये संगीत मय मृदंग ध्वनि सुनाये झूम झूम कर शिव गण नाचे खेलत होली … Read more

जीवन का यथार्थ

जीव तो पराधीन होता है, ईश्वर के समान स्वतंत्र नही, काल चक्र के पहिये में एक दिन विलुप्त हो जाता है ।समस्त संग्रहों का अंत विनाश है, लौकिक उन्नतियों का अंत भी है पतन, वृक्ष के पके हुये फल का पतन ही तो अंततः होता है । संयोग का अंत वियोग है,जीवन का अंत मरण … Read more

कोयल बोले

मनमोहक वायु डोल रही है ,डालों को झकझोर रही है ,आम के घने पत्तों में छिपी बैठी है काली कोयल बोल रही है । रंग रूप से तो काली है पर बोली उसकी निराली है फुदकती है वह डाली डाली,मीठे आम में मिश्री घोल रही है ।कौआ कोयल तो एक जैसे हैं,देखने में समान ही … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग सात

पुरानी यादों की सातवीं श्रृंखला में चर्चा घर आये पाहुन की आज हम करते हैं पुरानी यादें साझा करते हैं अतिथि घर में आते थे “अतिथि देवोभव “ का आदर पाते थे ख़ूब आदर सत्कार किया जाता था देव तुल्य उन्हें समझा जाता था परिवार के सदस्य समान वे रहते थे घुलमिल कर वे रहते … Read more

हे मेरी प्यारी माँ

हे मेरी प्यारी माँ !तू तो कहाँ चली याद तेरी जब आती हैं नयनों में आंसू मेरे आते हैं ।जब भी घर मैं जाता था तू दौड़ कर गले लगाती थी कितना सुंदर लगता था सब सपने जैसे अब लगते हैं ।भाई बंधु सब बिखर गये,कुछ इधर गये कुछ उधर गये,घर बार मेरा सब छूट … Read more

पुरानी यादें हैं यादों का क्या भाग छ

पुरानी यादों की छठी श्रृंखला में ननिहाल की चर्चा आज हम करते हैं पुरानी यादें साझा करते हैं नाना नानी के घर की तो बात ही क्या कहने जितनी भी चर्चा करे सब कम ही तो लगता है हर बच्चे उतावले रहते हैंनानी के घर जाने को तत्पर रहते हैं भगवान जाने यह कैसा बंधन … Read more

वक्त

सब वक़्त एक समान नहीं होता यह तो बदलता रहता है, आप कैसे हैं, आप कौन हैं?तीन शब्दों में रिश्ता चलता रहता है ।समय पर जो साथ देता है उसे रिश्ते कहते हैं, जो दुख में साथ निभाता है उसे फ़रिश्ते कहते हैं ।समय जब अनुकूल होता है,दुनिया भी साथ देती है, समय जब प्रतिकूल … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग पांच

पुरानी यादो की इस पाँचवीं श्रृंखला में चर्चा संयुक्त परिवारों पर आज हम करते हैं और पुरानी यादें ताज़ा करते हैं बाबा जी और आजी जी, दादा जी और दादी जीछोटे पिताजी, बड़े पिताजी, मंझले पिताजी, बड़ी अम्मा जी, छोटी अम्मा जी, मँझली अम्मा जी, ढेरों काका जी और काकी जी, भैया जी और भौजी … Read more

रे मन भज अब तू सीता राम

दर दर भटके, डगर डगर तू ठोकर खाये, कहीं पर भी न शांति पाये, मृगतृष्णा में तू कब तक भागे, ठहर जा ! अब कर ले तू विश्राम । रे मन प्रभु के श्री चरणों का दर्शन कर ले, कलुषित मन को तू निर्मल कर ले, मानव जीवन का कर ले कल्याण, भज ले रे … Read more

मन मेरे चल उड़ चले

मन मेरे चल उड़ चले दूर बहुत दूर स्वजनों से मिले बिछुड़ो से मिले गले हम मिले जो गये दूर बहुत दूर मन मेरे कहाँ तक उड़े कहाँ पर चले कुछ भी न पता सब कहाँ को गये अब तू ही बता सब कहाँ को गये? हम वहीं पर चले मन मेरे .मेरे हृदय की … Read more