ऐ जिंदगी जरा ठहर जा रे
ऐ ज़िंदगी, ज़रा ठहर जा रे,काहे भागे अंधी चाल।मन का दीपक काँप रहा है,तेल न बचा, बाती ढाल॥तन तो चलता हाट-बाज़ार,मन बैठा सूने घाट।भीतर शोर, बाहर सन्नाटा,कौन सुने मन की बात॥मैं तो बँधा तेरी डोरी में,तू ही मेरी साँस।तू बिन सूना देह-नगरिया,टूटे हर विश्वास॥तन पर बोझ न दिखे ज़्यादा,मन पर पहाड़ समान।हँसत-हँसत थक जाता जीव,कहाँ … Read more