फँसे सांसत में मेरे प्राण हास्य
फँसे साँसत में मेरे प्राणचलाती वो तो नैना वाण, कहता फिर भी मेरी जानतुम बिन कैसे जिये । यही तो है असली पति की पहचान मन में इसे सब लो ठान, पीछे पीछे पति घूमता हर घुड़की वह सहता रहतामौन धारण कर सुनता रहता, झाड़ू पोंछा घर का करता किचन का पूरा कार्यभार सँभालता ऊपर … Read more