उठो द्रौपदी वस्त्र सँभालो

उठो द्रौपदी वस्त्र सँभालो चक्र धारी अब नही आयेंगेतुम्हीं को लेना होगा लोहा इन नरभक्षी इंसानों से ।छोड़ो मेंहदी भुजा सँभालो खुद ही चीर बचाओ अपनीबन जाओ तुम रण चंडी भिड़ जाओ अब तूफ़ानों से ।कब तक आस लगाओगी कृष्णा पुकार पर दौड़े आयेगे यह तो द्वापर युग नही है न ही रथी अब महाभारत … Read more

हिन्दी का ह्रास

ह्रास हो रहा हिन्दी भाषा का अंग्रेज़ी को शान समझते हैं पेट से एबीसीडी सिखलाते माडर्न स्वयं को समझते है ।बच्चा बोलता मम्मी डैडी माता पिता अब पीछे हैं दादा जी ग्रांड पा बन गये दादी को ग्रांड मा कहते हैं ।नहीं जानते वे काका काकी रिश्तों की मिट गयी पहचान जो सिखलाते केवल अंग्रेज़ीबच्चों … Read more

इंसान की फ़ितरत

इंसान बोला कोयल से तेरी बोली बहुत मनोहररंग रूप से काली न होती तो कितना अच्छा होता । सागर से वह जाकर बोलातेरा हृदय है बहुत विशालकाश तेरा जल खारा न होता तो तू कितना अच्छा होता ।इंसान ने फ़ितरत बदली पहुँच गया गुलाब के पासदोस्त तुझमें काँटे न होते तो कितना अच्छा होता ।तीनों … Read more

राम खड़ाऊँ कहाँ गयी

हे राम ! जरा तुम ही बताओ तेरी राम खड़ाऊँ कहाँ गयी इस कलि काल की दुनिया में सगे सम्बंधी आज हुये बेमानी । कर रहे छल कपट आपस में नीति धर्म सब विलुप्त हुये भरत ने राज सिंहासन हड़पाकर रहे वे अपनी मनमानी ।कैकेयी खड़ी अट्टहास कर रहीकौशल्या हुई घर से निर्वासित राजा दशरथ … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग आठ

यादें हैं यादों का क्या जहन में मेरे बने रहती हैं.अक्सर याद आता है मुझे बचपन का वही पुराना घर बड़ी बडी चौपाल घर की कच्ची दीवालें और छप्पर छत थी टपकती तो क्या हुआ आत्मिक आनन्द उसमें मिलाआत्मीयता उसमें ही थी घुली जान छिड़कता था परिवार पर चौखट पर बैठी मेरी आजी करती रहती … Read more

हे कान्हा तुम अब आ जाओ

विपत्ति पड़ी है बहुत ही भारी हे कान्हा तुम अब आ जाओविपत्ति पडी है बहुत ही भारी, त्रसित हो रहे सब नर नारीराक्षसों की भीड़ खड़ी है, विध्वंस कर रहे दुनिया सारी एक द्रौपदी ही नहीं धरा पर,चहुँओर चीर हरण हो रहा हैचीत्कार कर रही अबला सारी, नारी की लाज बचा जाओपार्थ हुये निष्क्रिय आज … Read more

एक पत्नी की वेदना

हे प्रियतम ! तुम मेरे जीवन में आयेबहारों की बगिया बनकर मैने संजोये सुन्दर सपने तुमसा जीवन साथी पाकर । खायी क़समें साथ साथ जीवन पथ पर चलने कीहृदय में रच बस गये आप धन्य हुई मैं तुमको पाकर ।ख़ुशियों के मेरे किवाड़ खुलेजीवन बगिया खूब महक गयीकूद रही थी चहक रही थी अपने पति … Read more

रे मन क्यों बौराया भजन

रे मन क्यों बौराया इस जग मेंभटक रहा तू इधर उधर !नहीं रहता स्थिर एक समय चलायमान सदा दिखता हैमृगतृष्णा में बहक गया है अपने अस्तित्व को भूल गया पुण्यों से मिलता मानव तन है इसको तूने क्यों व्यर्थ किया पहचानी राह न जाना किधरतू भटक रहा है इधर उधर । रे मन सेवा, परोपकार, … Read more

तीन मुट्ठी तंदुल

प्रिये ! दे दो मुझे कुछ भेंट कान्हा से मिलने जाना हैमेरा कान्हा अब वह कान्हा नही विश्व का प्रसिद्ध योद्धा है नमन करते हैं तीनों लोक त्रिलोकीनाथ कहलाता है रखना है उसके प्रतिष्ठा का मान खाली हाथ नही जाना है हाँ मैं ठहरा एक ब्राह्मण गरीब भिक्षा से केवल नाता है माँगेगा न वह … Read more

बेटा विजय

बेटे विजय के जन्मदिन पर ✍️💐💐💐💐💐💐💐प्यारा सा वह मेरा नटखट, आज मेरा भाग्य बना अरे पिता के प्रतिनिधि, तुझसे मिला सुख घना जो लिखूँ सब कम तर है तेरी सोच बहुत उच्च तर है जब नाम ही है तेरा ‘विजय’ विजय तेरी सुनिश्चित है ईर्ष्या नहीं, अभिमान नहीं, झूठ फ़रेब का भान नही हंसमुख स्वभाव, … Read more