ख़ूबियाँ ढूँढो गीत

जो जैसा भी है अपनाओ, उसमें खूबियाँ ढूँढोथोड़ा सा प्रेम मिलाओ, प्रेम रस घोलो दोषों की धूल हटाओ, मन का दर्पण साफ़ करो,हर चेहरे में रब दिखेगा, बस इतना सा काम करो।काँटों के संग ही खिलते, बगिया में कोमल फूलरात अँधेरी चाहे जितनी, भोर करे कबूल,हर पत्थर में शक्ल छुपी है, मूर्तिकार की आस,विश्वासों की … Read more

औघड बाबा तांडव फाग

डम-डम डमरू गूँज उठा जब, काँपा काल-कपाल।भस्म-विभूषित देह महेश की, दहके दिग-दिग ज्वाल॥चिता-राख की उड़ती होरी, नभ पर रचे वितान।जग की झूठी शान जला कर, हँसे श्मशान-भवान॥त्रिपुंड अंकित भाल प्रखर, दृग में विद्युत-रेखा।एक दृष्टि में भस्म करैं, माया-जाल सहेजा॥मृग चर्म, व्याघ्रचर्म लहरत, डोले डमरू-ताल।प्रलय-नर्तन कर औघड़ बोलेसब जग माटी लाल!”॥जहाँ बुझी हर आस मनुज की, … Read more

उद्धव व्रज में

ऊधव मन में ज्ञान लिये, मथुरा से ब्रज आये,योग-वियोग की बात कहें, गोपिन को समझाये।गोपिन बोलीं “ऊधव! पहले बदलो अपनी दृष्टि,जहाँ प्रेम है वही नारायण, वहीं बसती है शक्ति।”गोपिन बोलीं “कहो ऊधव! कैसा योग सिखाओगे?जिस मन में बस श्याम हमारे, उसे कहाँ ले जाओगे?नयनों में नंदलाल बसे हैं, श्वास-श्वास में सृष्टिप्रेम ही शक्ति, प्रेम ही … Read more

रामायण क्या है

“रामायण” क्या है? रामायण क्या है?रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं,यह मनुष्य के भीतर छिपेश्रेष्ठतम गुणों का आईना है।यह वह दीप हैजो अंधकार में नहीं,अहंकार में जलता है।रामायण पढ़ने की नहीं,जीने का महा ग्रंथ है।यह बताता है किजीवन में भोग से नहीं,त्याग से ऊँचाई मिलती है।यहाँ अधिकार नहीं,कर्तव्य बोलता है;यहाँ स्वयं नहीं,दूसरा पहले आता है।यहाँ पति … Read more

निर्गुण भजन हे प्रभु तू ही दिखे हर मोड़

पीछे मुड़कर देखूँ तो प्रभु,तू ही दिखे हर मोड़सुख-दुःख दोनों तेरे ही रंग,जीवन तेरी डोरबचपन बीता खेल-खेल में,नाम तेरा अनजान,मिट्टी में जो हँसी बिखेरी,वही बनी पहचान।आज समझ आया जीवन क्या,कल था जो कुछ औरपीछे मुड़कर देखूँ तो प्रभु,तू ही दिखे हर मोड़यौवन आया, मन भरमाया,माया का संसार,सपनों की पतंग उड़ी ऊँची,टूटी बारंबार।ठोकर देकर तूने ही … Read more

कवि चला गाँव की ओर अवधी

कवि बहुत रहे हो शहरन मा,चलऽ अब गाँव कइ ओर।सुघ्घर हवा, मीठ जल पावऽ,सुख मिलइ हर इक ठौर॥कटि गवा गन्ना खेतन मा,ट्रैक्टर ऊपर लदाय।फैक्ट्री कइ राहे चलि दीन्ह,मीठे सपना सजाय॥गेहूँ हँसइ हरियर-हरियर,बाली आवइ तैयार।सरसों ओढ़े पीयर चुनरिया,खेतन लागे त्यौहार॥अरहर बोले हमहूँ हईं,पीछे काहे रह जाय।दानन भरी बाली लहराय,गाँव कइ शान बढ़ाय॥मटर बोले ठहर जरा,अबहीं बचपन … Read more

मेरा मन रोता है गीत

हे प्रभु! देख ज़माने की ये हालत,मेरा मन रोता है।हर मासूम की आहों में,मेरा मन रोता है॥सड़क किनारे भूखा बच्चाठंड में सिसकता जाए,तन पर चिथड़े, आँखों में डर,नींद कहाँ वह पाए।है तो वह भी लाल किसी का,दर्द अकेले ढोता है,हे प्रभु! देख ज़माने की ये हालत,मेरा मन रोता है॥कंधों पर बोझ मज़दूरी काहाथों में कलम … Read more

ये प्रयागराज है

है पावन संगम की धरती,ये प्रयागराज है।आस्था, श्रद्धा, संस्कारों की बेनी ये प्रयागराज है॥ 2 गंगा–यमुना–सरस्वती,आकर यहीं समाएँ,अमृत-सा पावन जल लेकर,सबको जीवन पिलाएँ।दूर–दूर से आते भक्त,डुबकी लगा तर जाएँ,साँझ आरती की ज्योति में,माँ गंगा मुसकाएँ।श्रद्धा, प्रेम, विश्वास का,यह अनुपम अंदाज़ हैहै पावन संगम की धरती,ये प्रयागराज है॥ऋषि–मुनियों की तपोभूमि,ज्ञान की ज्योति जले,भारद्वाज आश्रम पावन,इतिहास यहाँ … Read more

कैसे भूलें माँ बाप के उपकार को छंद मुक्त

कैसे भूलें माँ–बाप के उपकार कोमाँ तो माँ ही होती है,कैसे भूलें उसके उपकार को,जिसके आँचल में सिमट जाता हैपूरा का पूरा संसार।नौ महीने पीड़ा सहकरजो जीवन को धरती पर ले आती हैकैसे भूलें उसके उपकार को।रात–रात भर जागती है,अपनी नींद कुर्बान कर देती है,बच्चे की एक मुस्कान परअपने सारे दुख भुला देती है।पालना–पोषण में … Read more

मीरा के गिरधर गोपाल भजन

मेरे तो गिरधर गोपाल सखा, दूजा न कोई जानूँ।देह–भेद सब मिथ्या लागे, प्रेम बिना कुछ न मानूँ॥मेवाड़ महल, राज वैभव,सब तज आई मीराँ,कुल की मर्यादा, लोक लाज,गिरधर पर वार दी पीराँछाले पैरों, प्यास हिय में,नाम रटूँ दिन-रैनूँ॥मेरे तो गिरधर गोपाल सखा॥वृन्दावन पहुँची, संत द्वार पर,दर्शन की अभिलाषा,गोस्वामी जी नियम कह बैठे,“स्त्री से मिलना बाधा”मीराँ हँसी, … Read more