भजन : “हे राधे कृष्ण मुरारी✍️
“हे राधे हे राधे राधे कृष्ण मुरारी॥”
“जय नंदलाला गिरिधारी॥”
हे राधे कृष्ण मुरारी,
हे नंदलाला गिरिधारी॥
हे मुरलीधर! हे वृंदावन बिहारी!
आपकी जय हो, जय हो, जय हो॥
क्या माँगूँ प्रभु आपसे,
न धन न दौलत चाहूँ॥
तेरी भक्ति में सुख पाऊँ,
कृपा दृष्टि तुझसे चाहूँ॥
बन जाऊँ मैं ग्वाल बाल,
संग तेरे यमुना तट खेलूँ॥
लीला तेरी मन हर लेती,
तेरे चरणों में मैं मेलूँ॥
बन जाऊँ मैं गोपिका,
राधे की टोली में रम जाऊँ॥
विरह अग्नि में जल जाऊँ,
प्रेम का सच्चा अर्थ पाऊँ॥
मन, प्राण, आत्मा समर्पित,
श्याम ही जीवन धन हो॥
शाश्वत आनंद की गूँज में,
तन-मन मैं बिसर जाऊँ॥
न तन की सुध, न जग की आस,
तेरी सूरत बस मन में हो॥
माया बंधन छोड़ के कह दूँ,
कृष्ण प्रेम में मीरा बन जाऊँ॥
चैतन्य-सा लुढ़का रहूँ,
कृष्ण-कृष्ण ही जपा करूँ॥
जीवन में और कुछ नहीं चाहिए,
केवल कृष्ण कृष्ण मन में हो॥
हे राधे कृष्ण मुरारी
हे नंदलाला गिरिधारी॥
जय मुरलीधर, जय बिहारी॥
आपकी जय हो जय हो जय हो॥