तूफ़ान भी कभी कोमल लगे, जब हाथों में हाथ हो,
बरसात की हर बूँद में, मन का दीपक साथ हो।
घुँघराती हवाएँ गाएँ, पत्तों पर नाचते गीत,
तुम्हारी हँसी की चमक से, खिल उठे हर फूल-सी प्रीत
छतरी भी अब फिज़ा में, रंगों की तरह बिखरी,
तुमसे जुड़ी हर साँस में, मीठी बातें छिपी।
चाय की प्याली में तारे, बरसात की रिमझिम धारा,
तुम्हारे नज़रों की छाया, बिखेरे प्रेम का सवेरा
घुटन मिट जाए इस मौसम में, मन-मिलन की फिजा,
हर कदम पर मुस्कानें हों, और बातें हों हँसी भरा।
रिमझिम बारिश में तुम-मैं, मिलकर बन जाए गीत,
प्रेम की हर बूँद कहे, यही है जीवन का गीत
तूफ़ान भी कभी कोमल लगे, जब हाथों में हाथ हो,
बरसात की हर बूँद में, मन का दीपक साथ हो।