कैसे कहूँ वर्णन करूँ बाल रूप श्री राम
श्याम शरीर मन मोहनी, छवि पावन अभिराम ।
लाल कमल सम चरण तुम्हारे, नख ज्योति उजियार।
मोती जैसे बिखरि पड़े हों, चरणतल सुंदर सार॥
नील कमल सम अंग सुहाना, जलधर जैसा श्याम।
कोटि मनोहर कामदेव भी, तजत ह्रदय अभिराम॥
वज्र, ध्वजा, अंकुश के चिह्नन, शोभित चरण तुम्हारे
नूपुर की मधुर ध्वनि सुनि के, मुनिजन के मन हारे
कमर करधनी, तन त्रिरेखा, नाभि सुंदर प्रिय लागी
मणिमाल से शोभित भुज-दंड, दीप्त छवि हर लई॥
हृदय बीच बाघनख निशान, अति शोभा अद्भुत लाल।
रत्नहार छाती शोभत है, तजत ब्रह्म विस्माल॥
शंखसदृश कंठ तुम्हारा, ठोड़ी अति मन भावन।
लाल ओंठ अरु दंतुलियाँ, लजत शशि की छावन॥
कपोल गुलाबी तिलक मनोहर, नासिका अनुपम रूप।
तोतल वचन अमृतरस बरसे, सुन हरषत जग रूप॥
घुंघराले केश सुवासित सजे, कौशल्या सुख पाई।
पीत झंगुली तन पर सोहे, छवि ब्रह्मा न समाई॥
घुटनों हाथों चलत सुहाए, छवि हरि अनुपम मान।
शेष, सरस्वती, वेद न पा सकें, तव रूप बखान॥
हे बालरूप श्रीराम तू, मन मोहक सुखरूप।
नयन निहारत रमि गया, जड़ चेतन सब भूप॥