आया सावन मनभावन

बरसे सावन बादल गरजे

काले मेघ हैं नभ में छाये

झूम झूम के पानी बरसे

आया सावन मनभावन ।

हरियाली प्रकृति में छायी

नयनों को अभिराम दे रही

मदहोश कर रही है बारिश

मयूर नृत्य कर रहे वन वन ।

सर सरिता फूली न समाती

भरी नीर से कंठ गले तक

उफान मार रही रह रह कर

तोड़ चली अपना तट बंधन ।

डाल डाल पर पड़े है झूले

यौवना मोहक गीत गा रही

पेंग मार मार कर झूला झूलें

मन हो गया मधुवन मधुवन ।

परदेश गये हैं पिया कमाने

प्रियतमा बैठी डगर निहारे

कब आयेंगे मेरे प्रियतम

जी भर कर लें आलिंगन ।

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