तू तो केवल एक राही है
चलना ही तेरी नियति है
कर्म में ही है अधिकार तेरा
ऐ पथिक तुझे चलना होगा ।
ठहराव नहीं अवसाद नहीं
आशा में ही जीना होगा
काँटों भरा पथ क्यों न हो
इसे तुझे पार करना होगा ।
संघर्षों से जो घबड़ाते हैं
वे तो कायर कहलाते हैं
रंग मंच तो यह दुनिया है
अपना रोल अदा करना होगा ।
जल जिसमें होता बहाव नहीं
उसमें कीड़े पड़ जाते है
जीवन नदिया की धारा है
इस धारा में ही बहना होगा ।
कंकड़ पत्थर पथ में मिलेंगे
उनसे तुझे टकराना होगा
प्रवाह कहीं अवरुद्ध न हो
तुझे तो सतत बहना होगा ।
यह जीवन जल का बुलबुला है
श्वासों का ही तो खेला है
पढ़ ले सुर ताल धड़कनों की
जीवन संगीत बहुत मधुर होगा ।
सूर्य चन्द्र और नभ में तारे
अपने गति से ही चलते हैं
अनुसरण कर इनकी प्रकृति का
इनसे सीख लेना होगा ।
महापुरुष वे कहलाते हैं
अपनी डगर स्वयं बनाते हैं
बढ़ा कदम अपने पथ पर राही
राह स्वयम् प्रशस्त होगा ।