गाँठ तो गाँठ है
बहुत चुभती है ये गांठे.
चाहे रिश्तों के कच्चे
धागों की हों गाँठें,
या शरीर में किसी हिस्से की हों गाँठें,
गाँठ है तो चुभती हैं वे गाँठें
बुरी तरह सताती है वे गाँठे,
आसानी से कहाँ खुलती हैं बंधी गाँठें
धागे टूट जाते हैं पर
मज़बूती से जकड़ी रहती हैं गाँठें
हाँ जिस धागे की खुल सकती हैं गाँठें
जरूर खोल ले वे गाँठें,
उस पर कैंची कदापि न चलाये
सावधानी से हटा दें पड़ी गाँठे
गाँठ तो गाँठ है
बहुत चुभती है ये गांठे.
नासूर बन जाती हैं पुरानी गाँठे
ज़िन्दगी का एक हिस्सा बन जाती हैं पुरानी गांठे
आदत में शुमार हो जाती है ये गाँठें
जीने की नयी आदत डाल देती हैं गाँठें
बिडम्बना तो देखिये
यदि खुल भी जाये बंद रिश्तों की गाँठें
तो पहले जैसी बात कहाँ ?
सब कुछ बदला बदला लगता है
सब अजनबी जैसे लगते है
अपने ही पराये लगते हैं
सही माने में फाँसी के फंदे की मानिंद होती हैं ये गाँठें
फांसी का फंदा भी तो गाँठ पर ही टिकता है
गाँठ तो गाँठ है
बहुत चुभती है ये गांठे.
गाँठों का एक दूसरा पहलू भी होता है
मीठी भी तो होती हैं कुछ गाँठें
वह है प्यार की गाँठें, आत्मीय जुड़ाव की गाँठें
मज़बूती से बंधी हुई कभी न खुलने वाली
सुन्दर रिश्तों की गाँठे,
कितने पावन होते हैं वे रिश्ते
जो रिश्ते बनते ही गठबंधन से हैं,
जन्म जन्मान्तर के बंधन के लिये
एक दूजे पर मर मिटने के लिये,
अमृत तुल्य लगती हैं ऐसी गाँठें
संजीवनी बूटी का काम करती हैं ये गाँठें,
गाँठ तो है पर यह गाँठ बहुत अच्छी लगती है
गाँठ तो गाँठ है
बहुत चुभती है ये गांठे.