डूबो तो इतना डूबो समुद्र तल से मोती चुन लाओ तुम !
उड़ो तो इतना उड़ो नभ की ऊँचाईयां नाप लाओ तुम ॥
मन तो बहुत ही चंचल है कंट्रोल में इसको लाओ तुम ।
फिसलने की फ़ितरत इसकी सबक इसे सिखाओ तुम ॥
छिछले ज्ञान का मूल्य नही मिथ्या भ्रम मत पालो तुम ।
ज्ञानी यदि है बनना तो अच्छे गुरू की शरण जाओ तुम ॥
विनम्र भाव चारित्रिक गुण है स्वयं को इसमें ढालो तुम !
संसार हो जाये नत मस्तक ऐसा सुपात्र बन जाओ तुम ॥