बेटी तो है साक्षात लक्ष्मी
बड़े भाग्य से घर आती है
जिस घर में पैदा हो जाती
घर को पावन कर देती है ।
पढ़ने लिखने में होती कुशाग्र
कहीं कमतर नही यह होती है
मिले इसे पर्याप्त अवसर तो
चाँद पर पांव यह रखती है ।
हर क्षेत्रों में छायी है बेटियाँ
सब जगह दबदबा है इनका
भूतल क्या है सागर क्या है
अंबर में भी आज यह उड़ती है ।
दो दो कुलों को है संवारती
दोनों का मान यह बढ़ाती है
दुख में भी यदि कटे ज़िन्दगी
चुपचाप सहन यह करती है ।
सहनशील होती हैं बेटियाँ
संघर्षों से ही इसका नाता है
कठिन विपदाओं को झेलती
उफ़ तक नहीं यह करती है।
निम्न सोच के वे लोग है
जो बेटा बेटी में अंतर करते है
प्रताड़ित करते हैं बेटी को
आंसू पीकर वह सोती है ।
बेटी है तब ही तो सृजन है
सृजन है तो है यह संसार
मत करो उपेक्षा बेटियों की
नव कन्याओं में बेटी होती है ।
आ जाये आन मातृभूमि पर
रानी लक्ष्मीबाई बन जाती है
साक्षात रण में माँ दुर्गा है
अधर्मियों का विनाश करती है ।