प्रेम की परिभाषा

प्रेम है आकर्षण

प्रेम है दिव्य शक्ति

प्रेम है ज्योति

प्रेम है जीवन का श्रृंगार

प्रेम बिना है जीवन सूना

प्रेम है सृष्टि का आधार ।

प्रेम ही दर्शन

प्रेम ही ईश्वर

प्रेम ही है मेरे

अन्तर्मन का भाव

प्रेम नहीं तो जन्म निर्थक

होता जीवन मे सर्वथा अभाव ।

दृष्टि पशु पक्षी पर डाले

देते प्रेम का

अद्भुत संदेश

प्रेममय जीवन वे सब जीते

जो कुछ मिलता

करते उसमे संतोष ।

कोई शास्त्र नहीं

कोई ग्र्ंथ नहीं

यदि मिलता प्रेम का

ढाई शब्द नही

प्रेम है अपरिमित

प्रेम है अनमोल !

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