आस कहे श्वास से

आस कहे श्वास से, धीरज धर ले भाई,

बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।

जो खोजे बाहर जगत में, खाली लौटे हाथ,

अंतर घट में जो उतरे, पाए हरि का साथ।

झूठी आस न पाल रे मन, टूटे सब परछाई,

बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।

न तेरा कोई, न मेरा कोई, माया का है खेल,

नाम बिना न साथ चले, राजा हो या फेल।

साँस-साँस में सुमिरन रख, कटे भव की खाई,

बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।

कर्म करे सो फल भरे, लेखा कोई न टाल,

जो बोया सो काटना, यही जग की चाल।

सहज भाव जो जी गया, उसकी जीत सवाई,

बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।

संत कहें सुन मूढ़ मन, त्याग अहं की दीवार,

जो झुका सो ऊँचा हुआ, यही सत्य विचार।

उमानाथ यह वाणी कहे, नाम अमर कमाई,

बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई ॥

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