जो संग रहे और साथ चले ना दिखे, ना जाने कोई,
फिर भी मन में दे वो सूरत, कौन भला वो होई ॥
जब जीवन की राह में छाए, अँधियारे दुख के बादल,
जब थक जाए मन, टूटे साहस, ना दिखे कोई संबल,
तब अंतर से कोई पुकारे “मत रुक, तू चल सोई”,
फिर भी मन में दे वो सूरत, कौन भला वो होई ॥
जब आँसू आँखों से बहते, वो मुस्कान बन जाए,
जब सूने मन में तड़प उठे, वो स्पर्श स्नेह लहराए,
हर पीड़ा को शांति में बदले, हर श्वास में छवि खोई,
फिर भी मन में दे वो सूरत, कौन भला वो होई ॥
जब कर्म-पथ कठिन हो जाए, जब धीरज साथ न दे,
वो ही भीतर से स्वर उठाए “विश्वास कभी न छोड़े,”
हर संकट में जो दीप जलाए, अंधकार मिटाए सोई,
देता पग पग पर वो शक्ति , कौन भला वो होई ॥
ना रूप, ना नाम, ना चेहरा, फिर भी हर मन में वास,
वो चेतन है, वो परम प्रभु है, जो देता हर सांस,
सृष्टि उसी की, शक्ति उसी की, हर कण में वह सोई
देता पग पग पर वो शक्ति , कौन भला वो होई ॥
वो ही रक्षक, वो ही प्रेरक, वो ही आत्मा की ज्योति,
वो ही जीवन का सार अमर, अदृश्य वही विभूति,
हर हृदय में जो शांति भरे, वही परम प्रभु सोई,
फिर भी मन में दे वो सूरत, कौन भला वो होई ॥