नमन करें महादेव को,
जगद्दननी का शुभ आशीर्वाद मिले,
माँ वीणा वादिनी का ध्यान करें,
नित्य रामायण वाचन शुरू करें ।
बाल्यकाल से शुरू करें,
दो चार चौपाई नित पढ़ा करें,
महामंत्र है हर चौपाई,
हृदय तल में इसे आत्मसात् करें ।
शंकर पार्वती का मंगल विवाह,
प्रभु का अयोध्या जन्म प्रसंग,
सीता स्वयंवर और धनुष भंग,
लक्ष्मण परशुराम संवाद पढ़े ।
पिता के आज्ञा पालन की,
वचन का धर्म निभाने की,
राम विछोह में प्राण त्यागने की
रामकथा सुन्दर पढ़ा करे ।
लक्ष्मण से भ्रातृत्व सेवा भाव,
भरत से त्याग और राज वैराग्य,
माँ सीता से पत्नी धर्म निभाने की,
जीवन में आदर्श शिक्षा ग्रहण करें ।
प्रभु का प्राणी प्राणी से अनुराग,
केवट से प्रभु भक्ति का राग,
शबरी का प्रेम में जूठे बेर खिलाने की,
पावन कथा का नित श्रवण करें !
माँ गंगे का पावन माहात्म्य,
श्रृषि मुनियों से प्रभु का संवाद,
सीता हरण, प्रभु की लीला प्रलाप,
राम भक्त हनुमान प्रसंग पढ़ा करें ।
जटायु का रावण से धर्म युद्ध,
प्राणों का अद्भुत बलिदान,
रीछ वानरों का मिलन संयोग,
सुंदर कांड नियमित पढ़ा करें ।
विभीषण का प्रभु से मिलन,
असत्य पर सत्य की विजय,
राम राज्य का राजधर्म,
नित श्रवण किया करें ।
काकभुशुडिं गरुण संवाद,
नारद का स्तुति गान,
देवताओं की नभ पुष्पांजलि
का आनंद लिया करे !
अवसादों में यदि घिर जायें,
दो चार चौपाई नित पढ़ा करें,
प्रभु की प्रभुता का मनन करें,
रामचरितमानस प्रतिदिन पढ़ा करें ।