अम्मा की चौखट ✍️
मैं बदल गया हूँ,
या तुम बदल गए हो?
या समय की धारा में
हम सब बह गये हैं
चौखट वही है
दरवाज़ा वही है
भाई वही है,
आशियाना वही है।
पर आवाज़
वो कहाँ गयी ?
जो दूर से ही
सुनाई पड़ती थी ।
हाँ चौखट पर
वो माँ नहीं है
जो निहारती थी
सड़क की ओर ।
सूनी हो गयी चौखट
अब आँसू बहा रही है
ये रिश्ते ये नाते
स्वार्थ की बलि चढ़ गये ।
यादें ही शेष हैं
पर जीवित तो हैं
यादें हैं
यादों का क्या ?