राम कृष्ण दो नाम अलग
दोनों भिन्न भिन्न दिखते हैं
दोनों ही है विष्णु अवतारी
दोनों एक ही होते हैं ।
युग युग की अपनी महिमा है
नर लीला प्रभु वैसी करते हैं
दोनों ही तो विष्णु स्वरूप
दो रूप पर एक ही होते हैं ।
बारह कलाओं से राम चन्द्र
नियमों में बंधे से दिखते हैं,
कृष्ण सुशोभित सोलह कला से
पूर्णतः बंधन मुक्त होते हैं ।
एक पत्नी धर्म निभाते राम
सियाराम हम उन्हें कहते हैं
सोलह सहस्त्र रानियाँ कृष्ण के
गोपियों संग रास रचाते हैं ।
दोनों को था वन ही प्यारा
चौदह वर्ष राम वन रहते हैं
कृष्ण भी पीछे नहीं होते
वन को ही मधुवन बनाते हैं ।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम
धर्म की राह पर दृढ़ रहते हैं
कृष्ण धर्म की स्थापन में
सारे छल बल अपनाते हैं ।
धोबी के एक लांक्षन पर ही
पत्नी को राम ने त्याग दिया
कृष्ण तो है अलग ही दिखते
शिशु पाल का शीश काटते हैं ।
राम स्वयम् ही युद्ध में उतरे
लंका पर विजय करते हैं
निःशस्त्र सारथी बन कर ही
कृष्ण महाभारत युद्ध करते हैं ।
राम ने उठाया धनुष वाण
कृष्ण सुदर्शन चक्र चलाते हैं
राम छिपाते दैवीय शक्तियाँ
कृष्ण शक्ति प्रदर्शन करते हैं ।
समुद्र तट पर राम हैं बैठे
सागर से पार माँगते हैं
कृष्ण ने इन्द्र को दी चुनौती
सीधे गोवर्धन पर्वत उठाते हैं ।
राम होते मर्यादा पुरुषोत्तम
कृष्ण योगीराज कहलाते हैं
दोनों धर्म की रक्षा में ही
धरती पर अवतरित होते हैं ।