हिन्दी का ह्रास

ह्रास हो रहा हिन्दी भाषा का

अंग्रेज़ी को शान समझते हैं

पेट से एबीसीडी सिखलाते

माडर्न स्वयं को समझते है ।

बच्चा बोलता मम्मी डैडी

माता पिता अब पीछे हैं

दादा जी ग्रांड पा बन गये

दादी को ग्रांड मा कहते हैं ।

नहीं जानते वे काका काकी

रिश्तों की मिट गयी पहचान

जो सिखलाते केवल अंग्रेज़ी

बच्चों को अपनों से दूर करते हैं ।

कैसे सीखेंगे अपनी संस्कृति

अपनी मातृभाषा और पहचान

जरा सोच लो ऐ अभिभावकों

ज़िम्मेदारी से आप मुकरते है ।

हिन्दी पखवाड़ा मनाया जाता

पर होती केवल खाना पूर्ति

चाय समोसा सब गटक जाते

केवल अपनी फ़ोटो खिंचवाते हैं ।

हिन्दी पुस्तकालय बंद पड़े है

अलमारियाँ धूल चाट रही

कौन पढे पढ़ाये हिन्दी भाषा

बच्चे जब कान्वेंट जाते हैं ।

भारत की यह पावन धरती

श्रृषि मुनियों की तपोभूमि रही

संस्कृत से ही हिन्दी निकली

सरस सरल इसे मानते हैं ।

मत त्यागे मातृभाषा को

न इससे हृदय से घृणा करें

सिखलाओ अपने बच्चों को

हिन्दी से गौरव हम पाते हैं ।

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