किस ओर जा रही तू ज़िंदगी,
हर राह में दिखती तू अजनबी,
चेहरों के बीच तन्हाई है,
रिश्तों में अब बस औपचारिकता सी॥
हर मोड़ पे यादें बिखरीं पड़ीं,
कुछ हँसीं, कुछ आँसू जुड़ीं,
जो पास थे, अब दूर हुए,
बातें रह गईं अधूरी सी।
नज़रों में चमक तो है मगर,
दिल में वो गर्मी अब नहीं,
भीड़ में भी खालीपन है,
हर चाहत अब मजबूरी सी॥
फिर सोच ज़रा तू कौन है,
कहाँ खो गई पहचान तेरी,
अभी समय है खुद को खोज,
मिटा उदासी की लकीरें येरी।
हर दिल में अब भी उजियारा है,
थोड़ी चाह हो, तो बहार है,
विश्वास जगा, मुस्कान जगा,
जीवन ख़ुशियों का संसार है॥