ज़रूरी नहीं जग में सभी सुखी ही होई,
लिखा जो ललाट पे, मेट सके न कोई॥
विधि की गति विधि ही जाने,
जान सका न कोई,
सुख है तो दुख भी होता,
बचा न जग में कोई॥
देव, दनुज, किन्नर सब देखे
सब दुखी ही दिखते हैं,
ईश्वर भी तो पीड़ित दिखता
वन-वन सिया राम भटकते सोई॥
मत घबराओ, दुखी न होओ,
दुनिया में सब दुखी हैं कुछ तो।
जीवन तो चलना है, रुकना नहीं,
संघर्ष में ही खुशियाँ ढूँढे कोई॥
जो आँधियाँ राह में रुकावटें बन जाएँ,
उन्हीं में दीयों की लौ मुस्कराएँ।
हर दर्द में भी गीत हम गुनगुनाएँ,
अंधेरों में भी उजियारा लाएँ॥
किस्मत से नहीं, हिम्मत से जीत बनाते,
हर ठोकर से सबक नया पाते।
गिरकर भी फिर खड़े हो जाते,
सपनों को सच में बदल दिखाते॥
जो मिला उसी में सुख सदा ढूँढो,
हर पल को जीवन का मीत समझो
तुलना न करो किसी से कोई,
खुश रहना ही सच्ची विजय होई॥
ज़रूरी नहीं जग में सभी सुखी ही होई,
लिखा जो ललाट पे, मेट सके न कोई॥