निर्गुण भजनः दुनिया इक रंगमंच है

दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।

आते-जाते काल में, मिलते रूप हज़ार ॥

राजा बने, फकीर बने, पल में धन-दरिदार,

हँसते-रोते जीवन कटे, है क्षणिक विस्तार।

नाम बिना सब सूना लगे, टूटे मोह-आधार,

दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।

तन की माया, मन का छल, सब झूठी शान,

साँस की डोरी टूटते ही, रह जाए पहचान।

साथ न जाए कुछ यहाँ, छूटे घर-परिवार,

आते-जाते काल में, मिलते रूप हज़ार।

गुरु की वाणी दीप बने, हर ले अंधकार,

भीतर बैठे राम को, पहचान ले एक बार।

कर्म करे, फल छोड़ दे, यही सच्चा सार,

दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।

सुख के मेले चार दिन, दुख की लम्बी धार,

आशा-निराशा के बीच, भटके मन संसार।

जो ठहरे साक्षी भाव में, वही सच्चा पार,

दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।

मैं-मेरी की गाँठ जब, खुल जाए एक बार,

शून्य में ही श्याम मिले, मिट जाए अंहकार।

उमानाथ कहे प्रेम से, सुन ले रे संसार,

आते-जाते काल में, मिलते रूप हज़ार।

राम नाम ही नाव बन, करती नैया पार ।

राम नाम खूब रट ले, नाम अमिट आधार॥

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