नाटक समझ के जीना रे मन, यह संसार है खेल।
जब तक चलती साँसें हैं , निभा ले अपना मेल॥
आज हो, कल नहीं रहोगे, पल में जाता काल
क्षणभंगुर है तन का मेला, सबका यही है हाल
प्रभु ने जितनी डोर थमाई, उतना ही चलती रेल
नाटक समझ के जीना रे मन, यह संसार है खेल॥
तुम तो केवल पात्र हो भाई, प्रभु है लेखक एक
लिखी हुई जो भूमिका है, वही निभाता देख
मान-अभिमान सब मिट जाते, रहता केवल खेल,
नाटक समझ के जीना रे मन, यह संसार है खेल॥
माया के ये जाल हमारे, बाँधें हर पल प्राण
प्रभु का नाम जपोगे जब तो, कट जाएँ संज्ञान
साधो मन का मार्ग जिसमें, जग ना रखे झमेल,
नाटक समझ के जीना रे मन, यह संसार है खेल॥
सेवा, दया, करुणा से ही, जीवन होता धन
प्रभु भक्ति में बीते क्षण-क्षण, वही सच्चा जीवन।
रखो विनय और प्रेम हृदय में, प्रभु ही है
नाटक समझ के जीना रे मन, यह संसार है खेल॥