माँ तू मेरा चित्त चुराती है
देर रात नींद नहीं आती है
जब जब दुखी मैं होता हूँ
तू मेरे सपनों में आती है ।
मुझको बहुत समझाती है
थपकी देकर तू सुलाती है
मैं छोटा मुन्ना बन जाता हूँ
मुझे लोरी गाकर सुनाती है ।
जिस दिन तू नहीं दिखती है
भीगी पलकों में मैं सोता हूँ
किस बात से नाराज़ होती है
अपना दुलार नही देती है ।
सभी माएँ एक जैसी होती है
बच्चों को प्यार सब करती हैं
कर देती सब कुछ न्योछावर
जान देकर भी रक्षा करती हैं ।
यही लगती बगल में बैठी है
हंस हंस कर बातें करती है
सूक्ष्म रूप में कहीं छिपी हुई
हर हरकत को मेरी देखती है ।
बिछुड़न प्रकृति की नियति है
पर यह तो बहुत ही खलती है
बर्दाश्त न हो रहा तेरा बिछुड़न
हृदय में शूल जैसी चुभती है ।
कोई तो न रहा इस धरती पर
विधि का विधान यही होती है
शाश्वत सत्य यही जीवन का
विदाई पूर्व सुनिश्चित होती है ।
टंगी तस्वीर में तुझे देखता हूँ
लगता जैसे आशीर्वाद देती है
कहीं गयी नही मेरे पास ही है
हर क्षण मेरे ज़हन में रहती है ।
दुखी न होना माँ तू मेरे लिये
तुझे नया घर बार बसाना है
जहां भी रहे खूब प्रसन्न रहे
प्रसन्नता में ख़ुशी मुझे होती है ।