नशा
नशा कैसे भी लग जाये नशा तो नशा होता है
नशा पीने से ही नहीं होता है नशा एक जुनून होता है ।
नशा मन से जुड़ा होता है
हर सोच से जुड़ा होता है
ऩशा तो ज़िन्दगी का
एक मीठा फ़लसफ़ा होता है
ख़ुशियों में झूमने का नशा होता है
गम में पीने का नशा होता है
प्यार निभाने का नशा होता है
प्यार में मर जाने का नशा होता है।
पढ़ने लिखने का नशा होता है
खूब कमाने का नशा होता है
ज़िन्दगी की हर बुलन्दियों को
छूने का नशा होता है
मानव जीवन ही नशे में होता है
नशा हर पहलू से जुडा होता है
कुछ कर गुजरने का नशा होता है
आसमान में उड़ने का नशा होता है ।
झूठी क़समें खाने का नशा होता है
सच पर मर मिटने का नशा होता है
पाप करने का नशा होता है
पुण्य कमाने का नशा होता है
भक्ति में रमने का नशा होता है
वैरागी बनने का नशा होता है
समाधि लगाने का नशा होता है
प्रभु के दर्शन पाने का नशा होता है ।
सत्कर्म करने में नशा आ जाये
तो जीवन सुफल हो जाता है
ग़लत रास्ते पर भटक जायें
मानव जीवन ही व्यर्थ हो जाता है
नशा जैसे भी हो जाये
मन मस्तिष्क पर छा जाता है
एक जुनून बन जाता है
शख्स हर सीमा को लांघ जाता है ।
नशा का प्रभाव ऐसा होता है
कोई अछूता नहीं दिखता है
वश विधि का भी नहीं चलता है
शिव को हलाहल विष भी पीना पड़ता है
नशा कैसे भी लग जाये
नशा तो नशा होता है
नशा पीने से ही नहीं होता है
नशा एक जुनून होता है ।