इंसान की फ़ितरत

इंसान बोला कोयल से

तेरी बोली बहुत मनोहर

रंग रूप से काली न होती

तो कितना अच्छा होता ।

सागर से वह जाकर बोला

तेरा हृदय है बहुत विशाल

काश तेरा जल खारा न होता

तो तू कितना अच्छा होता ।

इंसान ने फ़ितरत बदली

पहुँच गया गुलाब के पास

दोस्त तुझमें काँटे न होते

तो कितना अच्छा होता ।

तीनों बोल उठे मानव से

तेरी फ़ितरत अति गिरी हुई

गिरगिट जैसा रंग न बदलता

तो कितना अच्छा होता ।

देखता तू दूसरों में कमियाँ

अपने भीतर नही झांक रहा

ताक झांक की आदत ना होती

तो तू कितना अच्छा होता ।

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