बेटी आकृति !
शब्द नहीं है तुम्हारे इस पिता के पास
तुम्हारे गुणों का मैं कैसे बखान करूँ
तू पुष्प है मेरी डाली का,
तू तो मेरा अरमान है !
मेरे आँगन की परी है तू ,
पूरे परिवार की राजदुलारी है ,
तू मेरे दिल की धड़कन है,
एक प्यार भरा अहसास है ।
तेरे बिनु सब कुछ सूना है,
आँगन इस तेरे बाबुल का,
घर की तू तो रौनक़ है
ख़ुशियों का भंडार है ।
सब कुछ तूने पाया है
अपनी ही कौशल के बल पर,
गर्वित तेरा पापा है
सब कुछ तुझ पर क़ुर्बान है ।
हे बेटी ! क्या बोलूँ....,
अब अधिक शब्द नहीं है तेरे पापा के पास,
हाँ तू मेरा मान है, तू मेरा वजूद है
तू ही मेरा अभिमान है !
हर पिता की एक ही चाहत है,
लाये ढूँढकर सुघड़ सलोना वर ,
‘ तन्मय’ दमकते कोहिनूर हीरे जैसा
मेरा प्यारा यह दामाद है ।
अक्स है तू मेरा फिर भी
दूसरा अक्स ढूँढकर मैं लाया हूं ,
दाम्पत्य जीवन हो सुखमय,
हृदय से मेरा यही आशीर्वाद है !
हे बेटी ! महका देना तुम जीवन सबका,
कर्नल साहब के घर ख़ुशबू बनकर,
विखेर दे ख़ुशियाँ दोनों घर पर
तेरे पापा का यही अरमान है ।
प्यारा पापा